Thursday, 17 March 2016

Bat and Hunter Man





चमगादड़ और शिकारी




 एक बार एक शिकारी ने एक चमगादड़ को पकड़ लिया । वह " कृपया मेरी जान बख्श दो ! मेरे छोटे -छोटे बच्चे   घर पर मेरी प्रतीक्षा कर रहे होगें । मुझ पर दया करो । "
    "बिलकुल नहीं। " शिकारी बोला -" मैं पक्षियों पर दया नहीं करता । "
   " परंतु मैं पक्षी नहीं हूं । "  चमगादड़ ने कहा - " मेरा शरीर देखो । मैं देखने में चूहा लगता   हूं । ",
   " हूं ! " शिकारीने चमगादड़ को ध्यान से देखा और उसे छोड़ दिया । 
    दुर्भग्यवश कुच दिनों बाद उसी चमगादड़ को किसी दूसरे शिकारी ने पकड़ लिया । 
  " कृपया मुझे जान से मत मारिए ! " चमगादड़ घिघियाया--
  " मेरे ऊपर दया दृष्टि कीजिए । " 
  " बिलकुल नहीं ! " शिकारी ने जवाब दिया--" मैं चूहों पर दया नहीं करता । "
 " पर क्षीमान मैं चूहा नहीं हूं । " चमगादड़ बोला --" आप मेरे पंखदेखिए । क्या चूहों के पंख होते हैं ? "
   शिकारी ने उसकी बात सुनकर उसे छोड़ दिया ।  इस प्रकार  उस चमगादड़ को दूसरीबार जीवंदान मिला ।
   
   निष्कर्ष : चालाक लोग  अपनी सुविधानुसार अपनादल बदल लेते हैं ।
   
 





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